रविवार, 29 नवंबर 2015

क्रिकेट की खूबसूरती !

क्रिकेट की खूबसूरती !
बहुत से लोग ज़्यादातर जो 20-20 के दीवाने हैं , क्रिकेट की खूबसूरती सिर्फ रनों की बरसात मे मानते हैं , चौके छक्के मे मानते हैं !उन्हे गेंदबाजों और क्षेत्ररक्षकों की कदर ही नहीं !मेरी असहमति है !
क्रिकेट तब बेहद खूबसूरत लगता है
-जब तेज गेंदबाज 160 केएम की रफ्तार से गेंद फेंकता है और बल्लेबाज घुटने टेक देता है !
-जब मिडल स्टम्प उखड़ कर चकरघिन्नी बन जाता है !
- जब फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर फील्डर असंभव सा कैच पकड़ता है !
- जब स्पिनर गेंदबाजी कर रहा हो , बल्लेबाज को चारों ओर से फील्डर घेरे हुये हो  और बल्लेबाज स्पिनर की धुन पर नाच रहा हो !
- जब गेंद हवा मे होती है और सांस अटक जाती है - छक्का या कैच !?
आदि !
क्रिकेट सिर्फ बल्लेबाजों का खेल नहीं है , गेंदबाजों और फील्डरों का भी है ! वे भी हमारी प्रशंसा के हकदार हैं !ज्यादा नहीं तो कम भी नहीं !

मंगलवार, 24 नवंबर 2015

सवाल है कि क्या वे सहिष्णु हैं !?

सवाल है कि क्या वे सहिष्णु हैं !? 
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उन्होने  कहा - हम सहिष्णु हैं तुम्हें बोलने दे रहे हैं , वरना  तुम्हारा गला भी घोंट सकते थे !
उन्होने  कहा - हम सहिष्णु हैं , तुम्हारे मुंह पर सिर्फ  स्याही फेंकी है , वरना तेजाब भी फेंक सकते थे !
उन्होने कहा - हम सहिष्णु हैं, तुम्हें सिर्फ पीटा है , वरना हत्या भी कर सकते थे !
उन्होने कहा - हम सहिष्णु है , सिर्फ पाकिस्तान जाने के लिए कहा है , चाहते तो भेज भी सकते थे !
उन्होने कहा - हम सहिष्णु हैं , सिर्फ तुम्हारा पुतला जलाया है, वरना तुम्हें भी जला सकते थे !
उन्होने कहा-हम सहिष्णु है , सिर्फ बलात्कार की धमकी दी है , वरना बलात्कार  भी कर  सकते थे !
उन्होने कहा - हम सहिष्णु है , सिर्फ गाली दे रहे हैं , वरना गोली भी मार सकते थे !
सवाल है कि क्या वे सहिष्णु हैं !?
                                               द्वारा - श्रवण

शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

जेम्स बॉन्ड

इस पर बड़ी हायतौबा मची है कि जेम्स बॉन्ड की "स्पेक्टर " मे किसिंग सीन पर सेंसर बोर्ड ने कैंची चला दी ! वैसे जेम्स बॉन्ड क्या , हॉलीवुड की लगभग हर फिल्म मे एक आध दृश्य ऐसे होते ही हैं !लेकिन  हम जेम्स बॉन्ड की फिल्मे इस दृश्यों केलिए नहीं देखते , यदि ऐसा होता तो सीधे पॉर्न न देखते ?!हम जेम्स बॉन्ड की फिल्मे देखते हैं लार्जर दैन लाइफ हीरो और विलेन के लिए , खौफनाक स्टंट के लिए , अंतर्राष्ट्रीय साजिश , सुदूर देशों के खूबसूरत लोकेशन , अजब गज़ब कारें, गैजेट्स और उनके चमत्कार , आदि आदि !बॉन्ड की फिल्मे बिना हीरोइन के बनेगी तो भी लोग देखेंगे ! कम से कम मैं जरूर देखुंगा !वैसे इन  फिल्मों मे महिला पात्र भी काफी मजबूत और महत्वपूर्ण होते हैं !लेकिन हेलिकॉप्टर , टैंक उड़ाता जेम्स बॉन्ड , मार मार के भुरकस निकाल देने वाला जेम्स बॉन्ड, हर मुश्किल , साजिश से जूझता, बचता जेम्स बॉन्ड , जानलेवा हालातों से आँख मिचौली खेलता जेम्स बॉन्ड आदि हिरोइन के साथ सेक्स करते जेम्स बॉन्ड से ज्यादा दिलचस्प लगता है !
#जेम्स_बॉन्ड

गुरुवार, 19 नवंबर 2015

स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की असंभाव्यता

स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की असंभाव्यता
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स्वतंत्र और आत्मनिर्भर होने की चाह ईश्वर और मोक्ष की कामना की तरह असंभव और अप्राप्य है !हमारा जन्म ही दूसरों के माध्यम से होता है ! उन्हे रक्त सम्बन्धों के आधार पर भले ही अपना कहें , होते हैं वे भी दूसरे !हम जो खाते हैं वह खुद नहीं उपजाते !जो पहनते हैं वे दूसरे तैयार करते हैं !हमारे अस्तित्व के लिए जरूरी लगभग सभी चीजों के लिए हम दूसरों पर निर्भर होते हैं !मरते भले ही अकेले हों , यह ख़्वाहिश तो बनी रहती है कि मरते समय हम अकेले न हो !
 एक आत्मनिर्भर और स्वतंत्र जीवन की अपेक्षा रखने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति का सबसे बड़ा दुख इस सच्चाई का एहसास है कि वह कभी भी पूर्ण रुपेन स्वतंत्र और आत्म निर्भर नहीं हो सकता !
बुखार मे उपजा ख्याल !

सोमवार, 16 नवंबर 2015

मेहरबानी होगी जो कुछ न पुछो !

 कुछ मत पुछो !
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- आपका घर कहाँ है !? आपका होम टाउन कहाँ है !?
-घर मे कौन कौन है !?
- आप छुट्टी मे घर नहीं गए !?
- आप दिवाली नहीं मनाते !?
-आपकी शादी हो गई !?
- शादी क्यों नहीं हुई !?
-आप स्मार्ट फोन क्यों  नहीं रखते हैं !?
-आप शौल क्यों ओढ़ते हैं ?
आदि आदि !
ऑफिस हो या रिहाइश का कमरा , पड़ोसी हो या सहकर्मी तरह तरह के सवाल ! हालांकि मानता हूँ  कि ये लोग सवाल बहुत सहजता से करते हैं , कोई अन्य मतलब नहीं होता , सच पूछिए तो इन्हे जवाब जानने की भी इच्छा नहीं होती , बस यूं ही बात कहने के लिए कुछ पूछ लेते हैं ! अमूमन टाल देता हूँ !चुप रहकर , घूर कर ! जाने दीजिये, कोई और बात कीजिये , आदि  कहकर !असहिष्णु, असामाजिक , घमंडी आदि का तमगा मुफ्त मे मिल जाता है ! खैर !इसे मैं  हर किसी के सवाल का जवाब देने , सफाइयां  देते रहने से बेहतर मानता हूँ !लेकिन कई बार बर्दाश्त से बात बाहर होने लगती है और तबीयत से गरियाने की इच्छा को बमुश्किल दबा पता हूँ !क्या पता किसी दिन सब्र छलक जाये !और सुना ही दूँ किसी को !
-आपका घर कहाँ है ?
-दस गज जमीन के नीचे !
-आप छुट्टी में  घर नहीं गए !
- न ! मसान मे शव साधना करनी थी इसलिए  नहीं गया !
-आप दिवाली नहीं मनाते !
- न ! मैं तमराज किलविष का भक्त हूँ , इसलिए नहीं मनाया !
-आपकी शादी हो गई !?
-रिश्ता लेकर आए हैं क्या !?
-शादी क्यों नहीं हुई !?
-अब ससुरों ने दहेज बचाने के लिए बेटियाँ ही पैदा न की तो मैं क्या करूँ !?
-आप स्मार्ट फोन क्यों नहीं रखते !?
- मैं भुच्च गँवार ! स्मार्ट हूँ नहीं तो स्मार्ट फोन  कैसे रखूँगा !
-आप शौल क्यों ओढ़ते हैं !
- कमीज फट गई है !ढंकने के लिए ! रफू के पैसे नहीं हैं !
आदि आदि !
शराफत और शालीनता  का भार कभी कभी असहनीय हो जाता है !
मेहरबानी होगी जो  कुछ न पुछो !

रविवार, 15 नवंबर 2015

वे अवार्ड क्यों नहीं लौटा रहे !- प्रत्युत्तर

वे अवार्ड क्यों नहीं लौटा रहे !-प्रत्युत्तर
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पहले वे पूछ रहे थे तब क्यों  नहीं लौटाया , अब क्यों लौटा रहे हो !अब वे पूछ रहे हैं कि पेरिस हमले के बाद पुरस्कार क्यों नहीं लौटा रहे !संदर्भ पेरिस हमले का है !और सवाल उन बुद्दिजीवियों से किया जा रहा है जो समाज मे बढ़ती असहिष्णुता और सांप्रदायिकता के विरोध मे पुरस्कार लौटा रहे थे !लेकिन निशाना सिर्फ साहित्यकार नहीं सारे सेक्युलर , उदारवादी हैं !
खैर !अब जवाब दिया जाए !
पुरस्कार कोई संस्था या सरकार देती है !पुरस्कार हम उसे ही लौटा सकते हैं जिसने दिया !और यह सु स्थिति मे लौटाया जाता है जब आप उस सरकार या संस्था की किसी कार्यवाही से घनघोर असहमति और विरोध जताना चाहते हैं ! पुरस्कार वापसी के संबंध मे पुरस्कार सरकार या सरकार की किसी संस्था ने दिया था ! विरोध बढ़ी हुई सांप्रदायिकता , लेखों पर हमले और हत्या , इसपर सरकार और संस्थाओं की चुप्पी से था और पुरस्कार सरकार को लौटाया गया !
अब आते हैं , पेरिस हमले पर !यह हमला जिन आतंकवादियों ने किया है वे कोई सरकार नहीं हैं आतंकवादी संगठन है !वे कोई पुरस्कार नहीं देते !उनकी नीतियों का विरोध पुरस्कार लौटकर तो हरगिज नहीं किया जा सकता ! मान लीजिये फ्रांस ने किसी पर हमला किया तो संभव है उस नीति से असहमत बुद्धिजीवी -यदि वह फ्रांस सरकार या वहाँ की संस्था से पुरस्कृत है तो - विरोध मे पुरस्कार लौटा सकता है !
पेरिस हमले को लेकर भारत के बुद्धिजीवियों से ऐसे सवाल करना हास्यास्पद है !क्या आईएसआईएस ने किसी भारतीय लेखक आदि को कोई पुरस्कार दिया है जो वे लौटाएँ !? और भारत का बुद्धिजीवी वर्ग क्योंकर किसी अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घटना के लिए जवाबदेह हो गया !? अगर इतनी से बात समझ मे नहीं आती तो कहा जाय ! भाई पहले समझिए , फिर लिखिए !


शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

वाट माझी बघतोय रिक्षा वाला

वाट माझी बघतोय रिक्षा वाला
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" वाट माझी बघतोय रिक्षा वाला ..... " एक मराठी गाना है जो महाराष्ट्र मे काफी लोकप्रिय है ! धुन मजेदार है,  थिरकाने वाला ! मस्ती के मूड के लिए एकदम उपयुक्त !
महाराष्ट्र मे था तो काफी सुनाई देता था !जिसमे अचरज कुछ भी नहीं !अचरज तो तब हुआ जब यह गाना असम मे सुना ! वह भी कालीपुजा के प्रतिमा विसर्जन मे ! लोग नाच रह थे इसकी धुन पर !पता नहीं वे समझ रहे भी थे या नहीं ! असम मे बंगाली गाना सुनना कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि यहाँ बंगाली आबादी बहुत बड़ी संख्या मे रहती है !हिन्दी यहाँ तक कि भोजपुरी गाने भी बहुत सुनाई देते हैं क्योंकि हिन्दी भाषियों -ज़्यादातर उत्तरप्रदेश और बिहार के - की भी अच्छी ख़ासी जनसंख्या है ! अब असम है तो आसामिया गाने तो रहेंगे ही !
                                    लेकिन मराठी गाना !? सचमुच हैरत की बात है ! इक्का दुक्का मराठी मानुष यहाँ भले ही हैं सरकारी नौकरी की मजबूरीयों की वजह से हैं लेकिन वे इस हद तक असर नहीं रखते कि एक मराठी गाने को लोकप्रिय कर दे !
वजह यही समझ मे आती है कि इन दिनों नेट की वजह से भौगौलीक दूरियाँ ज्यादा माने नहीं रखती !और संगीत वैश्विक भाषा है !! इस गाने की धुन इतनी अच्छी झूमा देने वाली  है कि आप गाना भले ही न समझे आपको गुनगुनाने  /नाचने का मन जरूर करेगा !
!!!  इस गाने की गायिका है मानसी नाईक ! निस्संदेह मराठी भाषा और संस्कृति के राजदूत ये कलाकार है ! कोई ठाकरे नहीं जो -मराठी के नाम पर गुंडागर्दी करता है ! जिसका नारा -मराठी बोला किंवा परत जा ( मराठी बोलो वरना वापस माने दूसरे राज्य जाओ ) गैर मराठियों  के मन मे मराठी भाषा के प्रति वितृष्णा ही पैदा करते हैं , मराठी भाषा के प्रति कोई लगाव नहीं पैदा कर पाता !!असम के लोग असम मे एक मराठी गाने पर नाचे वह भी स्वेच्छा से यह मानसी नाईक या उन जैसे कलाकार ही कर सकते हैं कोई ठाकरे नहीं , अपने समस्त धनबल , बाहुबल और राजनीतिक ताकत के बावजूद नहीं !
 यू ट्यूब पर गाना मौजूद है ! जरूर  सुनिए !
तो सलाम मानसी नाईक !
                                                   द्वारा - श्रवण