बुधवार, 4 मई 2016

मेरे बहुजन मित्रों - जातिवाद खत्म नहीं हुआ , इसका भेस बदल गया है !

जातिवाद खत्म नहीं हुआ , इसका भेस बदल गया है !

मेरे बहुजन मित्रों ! आप सफल हैं ! आप सम्पन्न हैं !आप अच्छी नौकरी में हैं !आपका अपना व्यवसाय है !और आपको लगता है कि आप जातिवाद के शिकार नहीं है तो थोड़ा सजग होकर जायजा लीजिये !आप पाएंगे जातिवाद बड़े महीन ढंग से चल रहा है और आपको शिकार बना रहा है !
आप नौकरी में है तो गौर कीजिये !कैसे किसी खास सरनेम वाले को सुविधा की पोस्टिंग मिलती है और दूरदराज़ के , कठिन समझे जाने वाले असाइनमेंट आपके हिस्से आते हैं!गौर कीजिये समान गलती के लिए कैसे आप दंडित किए जाते  हैं और बॉस की बिरादरी वाले की गलती बिना दर्ज किए रफा दफा होती है, सजा मिलना तो दूर की बात है !
आप व्यवसाय में है ! गौर कीजिये महाजन के जातिवाले को कितनी आसानी से क्रेडिट पर माल मिलता है और  आपको बिना पेमेंट के  माल भी नहीं मिलता !यह भी देखिये कि कैसे आपका बिल अटका रहता है और खास बिरादरी वालों का पेमेंट हथोहाथ होता है !
गौर कीजिये कैसे खास जाति वालों को पहले ही पता होता है किधर जमीन अधिग्रहण होने वाला है और वे आउने पौने दाम पर जमीन खरीदते हैं और सरकार को बेच कर करोड़ों कमाते है !
ऐसे बहुत से उदाहरण हैं !मेरे बहुजन मित्रों जातिवाद खत्म नहीं हुआ है ,उसका भेस बदल गया है !उसे पहचानिए !उसका विरोध कीजिये !कुछ लड़ाइयाँ बिना हार जीत की परवाह किए  बिना लड़ी जानी चाहिए !आप हार भी गएं तो भी उसका असर होगा !जातिवाद मरेगा नहीं लेकिन कमजोर तो होगा !
#मेरे_बहुजन_मित्रों

मंगलवार, 3 मई 2016

मेरे बहुजन मित्रों - आरक्षण भीख नहीं है !


आरक्षण भीख नहीं है !
अक्सर जातीय दंभ से भरे सवर्ण मित्र ये कहते पाये जाते हैं कि आरक्षण तो भीख है !मेरे बहुजन मित्रों यह जान लीजिये कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है !भीख नहीं !आरक्षण बहुजनों के उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का  उपाय है!
लोकतन्त्र में सरकार नागरिकों की बेहतरी के लिए कई तरह के उपाय अपनाती है !आरक्षण भी उनमें से एक है !इन उपायों को भीख कहना नासमझी है !कुंठा की उपज है !
दूसरे समाज के दूसरे वर्गों की बेहतरी के लिए भी सरकार ऐसे उपाय अपनाती है – जैसे महिलाओं के लिए आरक्षण , मातृत्व अवकाश आदि !इसका फायदा सवर्ण महिलाएं भी उठाती हैं !
कई अन्य उपाय भी हैं जैसे – उच्च सरकारी शिक्षण संस्थानों की फीस सब्स्डाइज्ड होती है !एम्स जैसे संस्थानों में इलाज सब्स्डाइज्ड होता है !गैस में सबसीडी दी जाती है !सेना के लोगों को नोमीनल कीमत पर ढेर सारी चीजें उपलब्ध कराई जाती हैं !
और तो और धनाढ्य उद्योगपति वर्ग के लिए भी कई तरह के टैक्स छुट , जमीन अधिग्रहण में सहयोग आदि है !इन्हे कोई भी भीख नहीं कहता !उसका फायदा उठाने वाले भिखारी नहीं कहलाते !
अलग अलग योजनाओं के लाभूक अलग हैं !आरक्षण बहुजनों के हित में है !उसका लाभ उठाने के कारण हमें शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं , न ही जातीय दंभ से भरे किसी सवर्ण के सामने सफाई देने की जरूरत है !
#मेरे_बहुजन_मित्रोंv


सोमवार, 2 मई 2016

मेरे बहुजन मित्रों -जातिवाद खत्म नहीं हुआ है !



जातिवाद तो खत्म हो गया है !?
जब भी जाति पर कोई पोस्ट डालता हूँ , ढेर सारे लोग कहने आ जाते हैं – जातिवाद तो खत्म हो गया है !मुझे हैरत नहीं होती जब देखता हूँ ऐसा कहने वाले लगभग सभी सवर्ण होते हैं !
यह तब है जब कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता जब अखबार में दलित पर होने वाले अत्याचार से संबन्धित खबर नहीं छपती ! ऐसा नहीं है कि ये खबरें लोकल अखबारों में छपती हैं ! नेशनल डेली भी इन खबरों से भरा रहता है !साथ में दर्ज होता है प्रशासन द्वारा संगठित उपेक्षा !
कई सर्वे के नतीजे जो इनही अखबारों में छपते हैं , बताते हैं कि परिवर्तित रूप में छूआछूत आज भी जारी है !शासन और संवैधानिक निकायों में इनकी उपस्थिती कम है !
खुद शहर/गाँव में घूमने निकलिए !खुद ही लोगों से बात कीजिये !दस मिनट की बातचीत में गहरे धंसा हुआ जातिवाद सतह पर तैरने लगेगा !
फेसबुक पर ढेर सारे सवर्णों की प्रोफाइल देखिये, जहां वे घृणित भाषा में दलितों ( और मुसलमानों के भी ) के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं !भूमिहार समाज/परशुराम सभा /राजपूत राज करेगा –आदि नाम से ढेर सारे पोस्ट/फोटोशोप वायरल होते रहते हैं जिसमें सवर्णों के जातीय गौरव का गुणगान भरा होता है और दलितों/पिछड़ों के प्रति जहर !
लेकिन  डिकास्ट होने का दावा करने वाले हमारे सवर्ण मित्रों को यह दिखता ही  नहीं है , विरोध करना तो दूर की बात है !दरअसल देख कर आँख बंद कर लेने वालों को कोई कुछ नहीं दिखा सकता है !उन्हे दिखाना और मनवाना हमारा मकसद भी नहीं होना चाहिए !
मेरे बहुजन मित्रों ! वे इंकार कर सकते हैं , हम इंकार नहीं कर सकते !हमारे लिए जातिवाद की पहचान और  उसका प्रतिकार जरूरी है !

रविवार, 1 मई 2016

मेरे बहुजन मित्रों - श्रम का सम्मान करें !

भारत में व्याप्त ब्राह्मणवादी /वर्णवादी व्यवस्था ऐसी है कि यहाँ शारीरिक श्रम करने वाला हेय दृष्टि से देखा जाता है !गौर कीजिये हिटने भी श्रम और कुशलता से जुड़े कारोबार/रोजगार हैं और उनसे जुड़े लोग हैं वे दलित या पिछड़े माने जाते हैं !
चमड़ा बनाने वाला , उससे जूते आदि बनने वाला दलित अछूत !
बाल बनाने वाला दलित !
कपड़ा बुनने वाला दलित !
बांस से डलिया/चटाई आदि बनाने वाला अछूत दलित
लोहे के हथियार/औजार बनाने वाला पिछड़ा !
मूर्तियाँ बनाने वाला पिछड़ा !
पशुपालन करने वाला पिछड़ा !
आदि !
मेरे बहुजन मित्रों !लानत भेजिये इस ब्राह्मणवादी व्यवस्था और कथित सवर्णों पर जो आपको खुद से, खुद के हुनर से , और अपने जैसे दूसरे हुनरमंदों से घृणा करना सिखाते हैं !अपना , अपने श्रम का साथ में दूसरे के श्रम/कौशल का सम्मान कीजिये !
#मेरे_बहुजन_मित्रों